स्वच्छ भारत अभियान: वादों और हकीकत के बीच का फासला
हैलो दोस्तों! जैसा कि मैं हमेशा कहता आया हूं, मुझे लिखना बहुत पसंद है। इस ब्लॉग के जरिए मैं समाज की उन समस्याओं को उठाता हूं, जो आम जनता के लिए परेशानी का सबब बन रही हैं। आज मैं अपनी कहानी नहीं, बल्कि स्वच्छ भारत अभियान और इससे जुड़ी एक सरकारी ऐप की नाकामी की बात करूंगा। साथ ही, मैं अपने गांव में हो रही एक गंभीर समस्या – कचरा डंपिंग और पर्यावरण प्रदूषण – को आपके सामने रखूंगा। यह पोस्ट उन लोगों के लिए है, जो ऐसी ही समस्याओं से जूझ रहे हैं और समाधान ढूंढना चाहते हैं।
स्वच्छ भारत अभियान: एक सपना जो अधूरा रहा
2 अक्टूबर 2014 को हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी। इसका मकसद था:
- खुले में शौच से मुक्ति (Open Defecation Free India)
- कचरे का उचित प्रबंधन और स्वच्छ पर्यावरण
- देश को 2019 तक स्वच्छ और कचरा-मुक्त बनाने का लक्ष्य
इस अभियान के तहत देशभर में जागरूकता अभियान चलाए गए, नारे गढ़े गए, और कई योजनाएं शुरू की गईं। लेकिन क्या यह अभियान जमीन पर उतर पाया? मेरे गांव की स्थिति और मेरे अनुभव को देखकर तो ऐसा नहीं लगता। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 2023 तक भारत के 4,476 शहरी क्षेत्रों को कचरा-मुक्त बनाने का लक्ष्य था, लेकिन कई जगहों पर यह सिर्फ कागजी बात बनकर रह गया।
Swachhata-MoHUA ऐप: दावा बड़ा, नतीजा शून्य
स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए Ministry of Housing and Urban Affairs (MoHUA) ने Swachhata-MoHUA ऐप लॉन्च किया था। इस ऐप का दावा था कि नागरिक:
- कचरे की अवैध डंपिंग
- गंदगी
- स्वच्छता से जुड़ी समस्याओं
की शिकायत दर्ज कर सकते हैं, और प्रशासन तुरंत कार्रवाई करेगा। लेकिन मेरा अनुभव? यह ऐप पूरी तरह बेकार साबित हुआ।
मेरे गांव में, मेरे घर से सिर्फ 500 मीटर की दूरी पर एक निजी जमीन पर कचरा डंपिंग शुरू हो गई। चौंकाने वाली बात यह है कि यह काम नगर परिषद के सभापति के निर्देश पर हो रहा है, और जमीन मालिक ने भी इसकी सहमति दे रखी है। नगर परिषद का कचरा हमारे घरों के पास डंप किया जा रहा है, जिससे:
- बदबू से जीना मुश्किल हो गया है।
- पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है।
- पिछले 20 दिनों से कचरे में आग लगी हुई है, जिससे जहरीला धुआं निकल रहा है। यह धुआं बच्चों, बुजुर्गों, और सभी के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहा है।
मैंने इसकी शिकायत Swachhata-MoHUA ऐप पर दर्ज की। नतीजा? कोई सुनवाई नहीं। इसके बाद मैंने PGPortal (Public Grievance Portal) पर शिकायत की और जिला अधिकारी (DM) को भी सूचित किया। लेकिन स्थिति जस की तस है। न कोई जवाब, न कोई कार्रवाई। इस ऐप का होना और न होना बराबर है।

जब डंपिंग करने वाला और जमीन मालिक एक हों, तो आम जनता क्या करे?
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह कचरा डंपिंग नगर परिषद के सभापति के कहने पर हो रही है, और जमीन मालिक की सहमति भी है। ऐसे में आम जनता के पास क्या रास्ता बचता है? कचरे में लगी आग से निकलने वाला जहरीला धुआं पर्यावरण प्रदूषण का गंभीर मामला है। यह Solid Waste Management Rules, 2016 और Air (Prevention and Control of Pollution) Act, 1981 का उल्लंघन है। फिर भी, प्रशासन खामोश है।
मैंने कई बार सोचा कि क्या सरकार सिर्फ अपनी ही सुनती है? खासकर बिहार जैसे राज्यों में, जहां आम जनता की आवाज को अक्सर दबा दिया जाता है। लेकिन मैं हार नहीं मानूंगा। अपने ब्लॉग के जरिए मैं इस मुद्दे को उठाता रहूंगा। मेरी समस्या अभी हल नहीं हुई है, लेकिन मुझे यकीन है कि सही कदम उठाने से समाधान जरूर मिलेगा।
आम जनता के लिए समाधान: अब क्या करें?
अगर आप भी मेरी तरह कचरा डंपिंग या पर्यावरण प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं, तो चुप न रहें। मैं कुछ उपाय साझा कर रहा हूं, जो मैंने अभी तक नहीं आजमाए, लेकिन अब आजमाने की योजना बना रहा हूं। ये उपाय आपके लिए भी कारगर हो सकते हैं:
1. सामूहिक याचिका दायर करें
- अपने गांव या मोहल्ले के प्रभावित लोगों को इकट्ठा करें।
- एक याचिका तैयार करें, जिसमें सभी के हस्ताक्षर हों।
- इसे नगर परिषद, DM, और बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (BSPCB) को भेजें। BSPCB की वेबसाइट (http://bspcb.bih.nic.in/) पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है।
2. RTI का सहारा लें
- सूचना का अधिकार (RTI) के तहत पूछें:
- इस डंपिंग साइट को मंजूरी कैसे और कब मिली?
- कचरे में आग लगने की घटना पर क्या कार्रवाई हुई?
- नगर परिषद के सभापति की इसमें क्या भूमिका है?
- RTI ऑनलाइन पोर्टल (https://rtionline.gov.in/) के जरिए आसानी से दाखिल की जा सकती है।
3. National Green Tribunal (NGT) में शिकायत
- कचरे में आग लगने से होने वाला पर्यावरण प्रदूषण NGT के दायरे में आता है।
- आप ऑनलाइन NGT की वेबसाइट (https://ngt.gov.in/) पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
- इसमें डंपिंग साइट की तस्वीरें, शिकायत नंबर, और स्वास्थ्य पर प्रभाव का जिक्र करें।
4. मीडिया और सोशल मीडिया का उपयोग
- स्थानीय अखबारों, टीवी चैनलों, या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अपनी समस्या बताएं।
- X पर अपनी बात को #SwachhBharat, #BiharPollution, और #CleanIndia जैसे हैशटैग के साथ शेयर करें।
- स्वच्छ भारत मिशन (@SwachhBharatGov) और बिहार सरकार (@IPRD_Bihar) जैसे आधिकारिक हैंडल को टैग करें।
5. स्थानीय NGO से संपर्क
- बिहार में Jeevika और अन्य पर्यावरण संगठन स्वच्छता और प्रदूषण के मुद्दों पर काम करते हैं।
- इनसे संपर्क करें और अपनी समस्या को उनके सामने रखें।
6. कानूनी रास्ता
- अगर डंपिंग साइट पर्यावरण नियमों का उल्लंघन कर रही है, तो स्थानीय वकील से सलाह लें।
- Solid Waste Management Rules, 2016 के तहत नगर परिषद को कचरे का उचित प्रबंधन करना अनिवार्य है। अगर वे ऐसा नहीं कर रहे, तो यह कानूनी उल्लंघन है।
मेरा मकसद: जवाबदेही और जागरूकता
मेरा इस पोस्ट को लिखने का सिर्फ एक मकसद है – सरकार और प्रशासन को जवाबदेह बनाना। अगर हमारी आवाज नहीं सुनी जाएगी, तो हम चुप नहीं रहेंगे। मैं अपने ब्लॉग के जरिए ऐसी समस्याओं को उठाता रहूंगा। अगर आपके गांव या शहर में भी ऐसी कोई समस्या है, तो कमेंट में जरूर बताएं। हम मिलकर इसका समाधान ढूंढने की कोशिश करेंगे।
भविष्य के लिए एक संदेश
स्वच्छ भारत अभियान सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी भी है। लेकिन जब प्रशासन ही गलतियां करे, तो हमें अपनी आवाज बुलंद करनी होगी। यह पोस्ट न सिर्फ Vमेरे गांव की कहानी है, बल्कि उन लाखों लोगों की आवाज है, जो ऐसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। मेरी सलाह है:
- चुप न रहें: अपनी शिकायत दर्ज करें, चाहे वह ऐप हो, पोर्टल हो, या मीडिया।
- जागरूक बनें: पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़े नियमों को समझें।
- सामूहिक ताकत: अपने समुदाय को एकजुट करें, क्योंकि एक साथ मिलकर हम ज्यादा असर डाल सकते हैं।
तब तक बने रहिए, मेरे साथ इस मुहिम में जुड़िए। हमारी आवाज को और बुलंद करना है। ✍️
| Help | Section |
|---|---|
| Swachhata-MoHUA ऐप: | Google Play Store या App Store से डाउनलोड करें। |
| PGPortal: | https://pgportal.gov.in |
| NGT शिकायत पोर्टल | https://ngt.gov.in |
| बिहार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड | http://bspcb.bih.nic.in/ |
| RTI ऑनलाइन | https://rtionline.gov.in/ |